ये फूलों के हार, ये गजरे बेशुमार,यह किसने किया सिंगार, लागे इतना प्यारा तूं
भक्तों ने झूला डाला, झूले पर खाटू वाला।
धीरे से बोले बर्बरीक, माता के कान में।
दरबार है खाटू वाले का, यह भक्तों के रखवाले का।
मोर छड़ी हाथों में, सोहे हैं बाबा श्याम।
मुझको नचाले बाबा अपने दरबार में
छम छम छम छम बाजे रे पायलिया
थे भूल्ज्यो सब कुछ मगर मां बाप ने मत भूल्ज्यो
श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊं।
सांवरिया म्हारी हाजरी भर लिजयो।
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