फैसला दरबार का संवारे सरकार का,मंजूर है
वेदसारशिवस्तोत्रम्,
ना में जानू आरती वंदन,ना पूजा की रीत
मुनिया पिंजरे वाली ना,तेरा साहब है व्यापारी
शिव शिव शिवाय
शिव शिव शिवाय शंकरा
महादेव तेरी मस्ती में भोलेनाथ तेरी भक्ति में,
मिचीं सी तीखी हमारी ननदी
कितनी प्यारी निराली हमारी ससुराल।
जय हो वाल्मीकि भगवान, तुम्हारा हर एक पर अहसान।
मंदिर जहां था फिर वही मंदिर बनाएंगे।
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