या चुनरी कड़े ते रंगाई ये सखी,रंग बरसे श्री किरसन का।
ढफ बाजे कुंवर किशोरी के,
ढफ बाजे,
फागुन की ग्यारस आई, रंगो का उत्सव लाइ
आया रे जन्मदिन श्याम धनी का, उत्सव आया महा बली का,
आयो फागण रंग रंगीलो नाचे मन को मोर,
गिरते हुए को श्याम धणी क्या,
अपने गले लगाओगे,
खाटू की नगरी में बुलावे बाबो श्याम धणी,
लीले वालो श्याम धणी को संग में नचाओ आज।
चालो जी चालो भक्तों ग्यारस की रात है आई,
आंख में असुवन धार,अब जग से गया मैं हार।
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