फागण की मस्ती में झूमे श्याम दीवाना मेरा मन
बाबा सेठा को तू सेठ,म्हारे कानी भी तूं देख।तेरी तिजोरी में भर्यो घणों माल बाबा
जबसे तेरा नाम लिया,
तूने मुझको थाम लिया,
राधे रानी की नगरिया, रंग लेकर अपनों केसरिया।
खेलो डट के होली खेलो डट के। पीछे हट के मोसे से पीछे हट के।
रंग गुलाल की महके खुशबू मौसम रंग रंगीला।
मारग में झगड़ो रे महलों में झगड़ो।कानुडा लाल मत करजे मारग में झगड़ो
होरी में ना लाज रहे प्यारी होरी में।
वृंदावन खेल रच्यो भारी वृंदावन ।
मस्ती का चढ़ गया रंग रंगीली होय गई।
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