वो तो हो रही लाल गुलाल मइयां हो रही लाल गुलाल,
सतगुरु जी ने मिलवा हालो रे, सजलो ने सिंगार।
जब जब तुझे पुकारूँ श्याम, तू दौड़ा आता है। ये रिश्ता क्या कहलाता है,
श्याम नचगी बराबर तेरे बंसी नु लवा दे घुघरू,
कान्हा माखन तुझे खिलाऊ आजा बरसाने
क्यों पीछे पीछे आवे,
तोहे श्याम लाज ना आवे,
मन माखन मेरो चुराए गेयो री प्यारो प्यारो मोहन
मोरे कान्हा जो आये पलट के
अबके होरी मैं खेलूंगी डट के
मेरे बाबा खाटू वाले भगतो की तो सुनते है सदा,
मेरे कुंजन के वासी बनवारी
चले अइयो खोल किवड़िया रे ।
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