कन्हैया गज़ब तेरा श्रृंगार
Author: Pushpanjali
चमके यूं तेरा मुखड़ा,जैसे हो चांद का टुकड़ा।
अंजनी मां थारो लाल कठे
चोलो तो पैर बाबो छम छम नाचे, कूंन कारीगर लायो बाबा
धन-धन भोलेनाथ बांट दिए,तीनो लोक को पल भर में।
मेरा मन पापी, मेरा मन कपटी, कभी भजे ना हरी का नाम रे।कैसे समझाऊं सांवरिया।
भाव का भूखा हूं मैं अरू,भाव ही बस सार है।
दुनिया बनाने वाले, वाह रे तेरी माया। तेरा, पार कोई ना पाया।
जपाकर जपाकर जपाकर जपाकर। हरि ओम तत्सत,हरि ओम तत्सत।
जरा के गाड़ी डाट भगत म्हाने,जानो नगर अंजार, बात मेरी मान ले।
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