उछल उछल कर ग्वाला नाचे,नाथ लियो फुसकार
Author: Pushpanjali
मैया तेरी चुनरी में,राम लिख दूं
मेरे मन मंदिर में मां,सुबह शाम तुम्हें देखूं
शेर सवारी शेर सवारी, उसमें बैठी मेरी मैया। चलाने वाला लांगुरिया।
राम जी रो नाम म्हाने,मिठो घणो लागे रे।
लेता हुं जब नाम तेरा, हिचकियां मेरी रुक जाती है
आजा भवानी तेरे चरण धुलाऊँगी।
गोपी बने श्याम, राधा मिलन के कारण।
आसन सहित चले आना गजानन मेरे भवनवा में
मारा सांवरिया सिरमोर ,
थारा बंद दरवाजा खोल।
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