रो रो कर तुमसे करूं पुकार, जल्दी से आओ पवन कुमार।
Author: Pushpanjali
मनै सांवरे का दर्श करादे मेरी मां।
ये मेरे सिर पे हाथ धरा, फूल मुरझाया मेरा खिला ,
ऐसा ऐसा लगन लिखाया गुरुजी मारा,
ऐसा ऐसा लगन लिखाया रे,
मैंने अर्जी लिखदी बाबा तेरे दरबार में
नाम रो दीवानो ज्यांरो ,
कोई क्या करे रे ।
मुझे जो भी कुछ मिला है,
तुमने ही सब दिया है,
जिस दिन सिर मैं अपना,
कहीं और झुकाऊं,
बन गई बन गई जोगनिया,
मैं तो अपने श्याम की,
सदा शिव सदा हम शरण में तुम्हारी
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