कैकई अयोध्या की,शान चली जाएगी,
बहन मेरी डोली सज गई आज, मैं चल देई हरिहर के संग में।
मेरे मन में बस गयी है, मोहन छवि तुम्हारी,
सांवरे प्यारे दर पे तुम्हारे, तेरे दीवाने आ गए
महाकाल की गुलामी, मेरे काम आ रही है।
मथुरा में तेरा जलवा, खाटू में नज़ारा है,
हिमालय नगरी देखो रे भैया, शम्भू दुनिया में मशहूर है।
तेरे लहू में वो ताकत है,
जय माधव मदन मुरारी, जय केशव कलिमल हारी।।
तुम्हे याद करते करते, गुजरे उमरिया सारी,
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