अब तो आकर बाँह पकड़ लो,
वरना मैं गिर जाऊँगा,
मेरे सपनों में आते है,
खाटू के बाबा श्याम,
जनम-जनम से दास मै बालाजी तुम्हारा
आवरा आछा बिराज्या बनकट पहाड़ में
पवनपुत्र है नाम तुम्हारा, ओ अंजनी के लाल
भाई रै तीन लोक के नाथ बैठ लिया अर्जुन के रथ मै।
तेरा दरबार निराला है। तेरा दरबार निराला है।
हो तीन रोज के बालक भूखे दरब मांग के लाइये हो।
भीड़ में भीड़ मची है भारी बुलावा श्याम का आया है।
जब जब हम दादी जी का मंगल पाठ करते है
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