बोले काशी काशी बोले बोले काशी काशी।
अर्जी करते करते,
मैं तो हार गया,
झोटा दीजो सँभार के मेरी सारी न अटके ।
राधा रो रो के कहने लगी है,
धारा आंसू की बहने लगी है,
दानी में सबसे बड़ा दानी बड़े मेरे शीश के दानी जैसा कोई नहीं।
सभी रूप में आप विराजे,
त्रिलोकी के नाथ जी,
मेरे बिक गये मदन गोपाला
भक्तो के भक्ति मे ,
उसे आना पड़ेगा,
खाटू में दुबारा।
हमरे भये नन्दलाल रे चली आना ननदिया,
नैना लड़े मुरलिया वाले से
मैं वृन्दावन को जाऊँ ।
You must be logged in to post a comment.