सुन मेरी बेटी पार्वती तेरा दूल्हा सबसे न्यारा है।
बाबा लागी लगन है,
तेरे नाम की
कोई पागल बुलाये,
तो मैं क्या करूं,
जागृत रहना रे नगर में चोर आवे है
भर सकता है घाव तलवार का,
बोली का घाव भरे ना।।
कन्हैया तू तो है बड़ा चित चोर,
करि मन नंद-नंदन ध्यान
हंसा हंस मिलया से हंस होई रे।।
युगलवर, नैन नींद रहि छाय
म्हारे बरत बड़ो एकादशी को।
सारो जगत छोड र आवियो,
बाबाजी हूं तो, थांरै द्वार,
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