फेक दही चिलम टपरिया मे। आरा रारा भरी दुपहरिया में।
बन गए साधू रख लई जटा। राम नाम का कोई ना पता।
गरुड़ चड़ मेरे घर आईयो भगवान।
सारी मटकी का माखन बिखेर गया रे
यशोदा तेरा लाला किधर गयो र
धन्य मरुधर देश है, सालासर नगर सुजान।
सतगुरु है अविनाशी , मुक्ति रहत है दासी
ग्यारस के दनि, इन आँखों से, उड़ गयी निंदिया रानी,
काई ल्यायो ले जालो बंदा, बांध गठरी में
कभी ना लिया शिव का नाम
सवेरे उठी काम काम काम
तन मन से बोलो यह छोटा सा नाम
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