एक बार शिवशंकर गौरा खेलें पता डार,
ओ दिल मईया दे मिलण नु करदा,
मईया दे नवराते आ गए।
नैन से नैन अब तो मिलाओ,
कब तलक हम से बचते रहोगे,
है तेरे अहसानों का मुझे गणपति जी अहसास
अंबे रानी के भवन में नाये लांगुरिया,
गरुड़ के रथ पे बैठकर मेरे घर आए श्री भगवान
मन सीताराम सीताराम रट रे,
थारा संकट जावे सब कट रे।
पिंजरियो पिंजरियो रे पक्षी कई निर्खे।
सांवरिया री बाटा जोऊ रे कद आंवोला पावना
पल पल में याद आवे रे सांवरिया री बातडली।
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