एक चिड़िया के दो बच्चे थे, वे दूजी चीड़ी ने मार दिये
माटी के पुतले इतना ना इतरा के चल
ऐ श्याम तेरे नाम से ही मेरी पहचान,
सांवरे दी यारी लागे सानू प्यारी।
मुझे हीरे से क्या लेना मेरा तो श्याम है हीरा।
जपता फिरूं में नाम तुम्हारा। हारे का सहारा बाबा श्याम हमारा
हिरदा में रेवो मावड़ी परदा में रेवो,
आज मेरा भी गठ बंन्धन करा दिजो इस नन्द के लाल के साथ,
कहाँ से आया कहाँ जाओगे, खबर करो अपने तन की
मान रे रावण अभिमानी माया रघुवर की ना जानी
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