जान लिया मेरी माँ, कहा पर रहती हैं,
काया रे तेरी पावनी रे बन्दे, हंस बटेऊ लोग।
कौन पावे याको पार, प्रेम नदिया की सदा उल्टी बहे धार।
Saiya mile lartaiya me kya Karu
शिबोहम शिबोहम शिबोहम शिबोहम, तेरे चरणों में सदा रहूं।
मोरे अंगना सुहाग बरसन लागा, लागा लागा
कोठे दी कंजरी नहीं मैं तो यार दी कंजरी या
शंभू बस तू ही तू,
मेरा शंभू शंकर तू ही तू।
तेरा झुंझनू में दरबार,तेरी हो रहीजय जयकार
आई कीर्तन की या रात, थाने आणो पड़सी,
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