सतगुरु जी मैं, जाऊं चरणा बलिहारी, सायब म्हारा सतगुरु जी ।।
मन से हंस बने मत कागा, संगत छोड़ दे खोटा की,
श्याम दर्शन, जरा दिखा जाओ, दिल की कुटिया, में मेरी आ जाओ ।
बनेंगे सारे बिगड़े काम, प्रभु श्री राम को पूजो,
आ गया फागण मेला अब तो शोर होना चाहिए।
शिवरात्रि का त्यौहार है शिव शंकर का वार है।
देवा देवा ओ महादेवा मेरा मन तेरा कैलाश रे
श्याम के रंग में रंगना है।
एक तू ही है मेरा बाकी सब है वहम
भोले कब से खड़े है दिल थाम के,
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