है पहचान हमारी,
एक बाबा नाम तुम्हारा,
पग रे बांध ने उन्दा रे लटके ,
अरे राम राम रे भाया राम राम रे,
मेरे बाँके बिहारी सांवरिया,
तेरा जलवा कहाँ पर नहीं है,
काला काला मंदिर काली काली चुनरी,
साथी होगा श्याम सभी का पर मेरी यह जान है,
भोले राम राम रे मैं तो पीहर को चली।
तेरी चम चम चमके तलवार चली आओ जगदंबे।
मन एक बार आजा गिरिराज की शरण में
गिरिराज की शरण में हमें मिल गया ठिकाना
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