जब हनुमत का हाथ अपने सर।
होली खेले बाबा श्याम,
आपा चाला खाटू धाम, होली खेले रे।।
फागणियो रंगीलो रंगीलो बाबो श्याम,
दूल्हा बनकर के, शंकर चले जिस घड़ी,
मैं तो मलूँगी गुलाल तेरे गालन पे मैं तो मलूँगी
चली बारात गौरा जी के द्वारे,
जोगी भेष धरकर, नंदी पे चढ़कर,
गौरा को बिहाने, भोलेनाथ आ गए है,
शिव नाम जपने की रात आई,
दूल्हा कैलाश पर्वत वाला।।
भाई महाकाल को उज्जैन नगरी।
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