राधा रानी रंगीली श्यामा प्यारी किशोरी
मत ज्यादा तरसा सांवरे दर्श करा दे फागण में।
मेरा कढ के कालजा ले गया खाटू वाला जी।
शिव शंकर की सजी है बारात सुहानी लगे रात दुल्हन बनी पार्वती।
म्हारा सद्गुरु है रंगरेज, चुनर मोरी रंग डारी।
हाथ जोड़ के बोली गवरजा
मीरां लागो रंग हरी
ऐसी कृपा करो गिरधर ना भूलूं तुम्हारा नाम।
भोलेनाथ तुम्हारे मंदिर में, नागों ने डेरा डाला है
एक दिन पार्वती कहने लगी शंकर से
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