जिसमें बोलै सै रमता रे राम, जुगलिया रे चाम की।
श्याम राधा दे द्वारे उते,
फूल बेचता,
राधा रानी फूल ले लो।
ए मेरे साँवरे,
तू बता रास्ता,
मेरे मन में उठे उमंग फागुन आ गयो
झांकी बनी विशाल बांके गिरधर की।
बम बम भोलेनाथ मंगा दे मोहे लाल चुनरी।
रींगस से खाटू धाम चले हैं देखो श्याम के दीवाने।
खाटू दरबार निराला मुझको भी बुला ले सांवरिया।
भज मन श्याम, श्याम, श्याम, श्याम को भज ले।
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