ओजी म्हारी सहेल्यां जोवे बाट, भंवर म्हांने खेलण द्यों गणगौर।
लड़ली लूमा झुमा ऐ,ओ म्हारो गोरबन्द नखराळो।
उड़ उड़ रे म्हारा काळा र कागला
कद माहरा पीव् जी घर आवे
घडलो थाम ले ,घडलो थाम ले देवरिया कमर बलखाये
लेता जैजो जी दिल्डो देता जैजो,
पाँच मोहर को साहिबा पिळो रंगावो जी
राधे मन में है तू ही तू,
जब कोई तकलीफ सताये, जब मन मेरा घबराये,
ढोला ढोल मंजीरा बाजे रे
काळी छींट को घाघरो, निजारा मारे रे
बालम के भरोसे देवर को पकड़यो हाथ
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