प्रेम रस बरस्यो री,
आज मोरे अंगना में,
श्याम थारो मुखडो चांद को टुकड़ों और महे पावां री धूल।
खाटू वाला साथ मेरे चल रहा है।
मने सांची सांच बता दे मीरा कुंन से गोपाल।
खाटू में बाजयो चंग,देश में होली आई रे।
लालर ल्यादे रे नंदड़ का बीरा हरीया ढाका री लालर ल्यादे रे ।
पहन ले पीलो पीलो घागरो
पिया आवो तो
मनड़े री बात कर ल्यां
म्हाने आवे अचंभो सौतन रे महला साजन क्यूं गया
ऊंचो राख निसान श्याम को , लाम्बी डोरी खींच
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