कालका बैठी बैठी नदी किनारे आप मंदिरियो थारो उजलो।
साजन रोज रोज काम ना करवाया करो।
देर करते क्यों गणपति आने में
मैया मैने दो दो कुल अपनाए
धुके रे मसाण ,
कर लेवो निज साय।
धन मांगू ना मैं दौलत मांगू
कठे स्यूं आई दाई, कठे स्यूं आयो नाई,
थाने सांची सांची बात को सुनादयूं खटको।
बेलन चिमटा लेके भागो, ऐसी सगी से डरियो
आ चरखी लाल गुलाल-चरखड़ी नहीं चलती जी नहीं चलती।
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