जुवा हस्तीनापुर में खेले रे कुंती के पांचों बेटा।
सिंगार देखा चलियो मैया के अद्भुत सिंगार।
मेरे नटवर नन्द किशोर प्यारे आ जाओ माखन चोर।
ब्याह रच्यो है म्हारी लाडली को
आई गौरा की कैसी बराती,दूल्हा ब्याहने के काबिल नही है।
हृदय के पट खोल दे, तूं राधे राधे बोल रे।
हरि माला तेरा जपना कठिन है।
मेरी लाज तुम्हारे हाथ पवन सुत अंजनी के लाला।
मुरली हमारी क्यों चुराई श्री राधे रानी।
खाटू में एक मूरत देखी ऐसी, बिल्कुल लगती बाबा तेरे जैसी
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