मांझी बनकर मोहन एक बार तो आ जाओ।
जो लेख लिखे हैं कर्मो में
उसके आगे कोई नहीं
यही है लक्ष्य हर बुजुर्ग का मान होना चाहिए
नयन ने बांध राखें
आज्या मनमोहन मिरां मेड़तनी बुलावे
अंजनी के लाला तने राम बुलावे। हवा में उड़तो आई रे तने राम बुलावे
तोरा मन दर्पण कहलाये ,
बनासा रो पाल्यो पोस्यो, बांदरो म्हार महलां चढ़ग्यो ।
चमक्यो चमक्यो सुरज चमक्यो-२ आज म्हारै आंगणै कि बन्नो घोड़ी चढ़यो
सन सना सन सांय-सांय, हो रही थी रेल में।
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