परदो लगाकर कइया बैठा रे सांवरिया,
मुझको ले कर चलो मेरे बाबा के पास।
लीले घोड़े ऊपर, बाबा श्याम की सवारी,
अजी मत बरसो इन्दर राज,
या जग सेठाणी भीजे,
सावन का महीना आया है, बहार के लिए
माला थारे नाम री अंबे मां फेरूं में आठों याम।
मैं तो दीवानी हो गई मेरे भोलेनाथ की,
चला ओढ़ के कफन अकेला, सब झूठा है जग का मेला
डाल दिया रे पानी में बिछोना।
कान्हा की मुरली में क्या बल है जिसमें राधा मगन है।
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