जय श्री राम जय श्री राम, मैं तो गाऊं सुबह शाम।
बैठेंगे सिंहासन पर श्री राम जी,
आज आए मोरे द्वार पालनहार।
राम रिझाया थारी आत्मा रिझेली
आज आए हैं अवध में श्री राम बधाओ मैं तो गाऊं सखीरी,
आ जाओ घनश्याम अब तो आ जाओ।
तुम्हरी और नयन दोऊ हमरे।
नगरी नगरी में दीप जला दो,
अयोध्या में राम आ गये
ऐसे रचना रचाये जो लागद होगे मोर
मेरें बालाजी सरकार,के तो रंग निराले हैं
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