यो के तेरो रुसणो,
घड़ी घड़ी के माय,
बैठी रही हवेली के,
खोल के किवाड़,
जब तक फागुण मेला तेरा आता नहीं है,
हाथों निशान मेरे लहराता नहीं है,
साँवरे सलोने तेरे नैन कजरारे,
इनमें ना जाने कहीं,
खो गया है मेरा दिल,
मैं तो अपने श्याम की दीवानी बन जाउंगी ।
ब्रज मंडल देश दिखाओ रसिया॥
दिखाओ रसिया रे दिखाओ रसिया
घड़ल्या डूब जा म्हारो परनोडो तिसायो जावे रे
तुम आए हो कलयुग में,
संसार के लिए,
एरी मेरे रथ ने मत ना रोकियो,ना रोकियो, मैं स्वर्ग लोक को जाऊं।
कोई कहे शिव काशी में है कोई कहे कैलाश में।
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