ईसरदास बीरा को कांगसियो म्हे मोल लेस्यां राज।
धुपियो देर धूपईयो ए, द्यो बाई रोवाक हाथ।
म्हें गोर भुवावण चाल्या राज, झिलमिल फुलडो पाट को।
नीव ढलती बेलड़ी जी।
मालन फूलड़ा सा ल्याए,
राजा क बाया जौ-चाना, माली क बायी दूब
गोर तिव्हारड़ देसां मारे, चोखी सी रोली भी होय।
ईसर आयो ए म्हारी गायां रोर गुलाब।
म्हारा बिकानेर घाट सुघाट, रंगरोड़ा घढ़ दे झूटणा।
नारायणी शरणम,
नारायणी शरणम्,
हे श्याम ध्वजा बंदधारी,
तुम ही सुनते हो हमारी
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