दातया खोल दे तू मेरे भी नसीब को,
Author: Pushpanjali
विनती सुनले, अंजनी के लाला हनुमान रे,
मैं तो हारावाले महाराज की दिन-रात पूजा करूं,
कर्जा तुम्हारा साँवरे, उतारना नहीं, बिन आपके ये जीवन, गुजारना नहीं।
उडीका तेरियां ने हारा वालया,
धन अंबे जोगणिया रानी, थारी महिमा जग में जानी,
डम डम वजे गुरा दा डमरु….
सोनी प्रीत लगी हारां वाले दे नाल,
फड़ो फड़ो नी सहलियो मखना दा चोर
दो दिन का जग में मेला सब चला चली का खेला,
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