उमरिया बीती जाए रे।
Author: Pushpanjali
गऊ बेचकर बकरी लयावे कन्या का धन खावे
गोविंद गोविंद गाऊंगी मैं तो सांवरे के रंग रंग जाऊंगी
हम वृंदावन आ गए
दूर से आया बाबा धाम तेरे खाटू।
वह लखदातार है वह लखदातार है।
श्याम जी को नाम ले लो
भाभी कड़वा तो बोल्या छे महाने बोलना
श्याम नाम ही दुनियां का बेड़ा पार लगाएगा।
निराली श्याम की नगरी निराला श्याम मेरा है
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