मेरे रोम रोम में बसते हैं श्री राम।
Author: Pushpanjali
बन्ने ने किया टेलीफोन बन्नी के लिए
रुठे रुठे डोले हनुमान जी कोई जाकर मना दो
बीरा रीमक झिमक भाती आजो।
आओ गजानन बैठो गजानन ठंडी ठंडी छांव में।
गजानन तुम्हे मनाऊँगी मैं हरी-हरी दूब चढ़ाऊंगी
बाजे बाजे रे शहनाई जनक नगरी
ठाकुर की आई है बारात तुलसा के आंगन में।
एक तरफ सांवले से कान्हा दूजी राधिका गोरी।
लीले की लीला न्यारी है, कि घूमें दुनिया सारी है।
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