हे पवनपुत्र बलकारी, थे राखो लाज हमारी
जाओ मेरे हनुमान बूटी ले आओ ।
सतगुरू दी दिवानी मैनू थोड़ कोई ना,
चली आवे जीभ निकाल हाथ में खड़क लिए खड़क लिए,
देने वाली मैया भिखारी सारी दुनिया,
कन्हैया ना चाहिए कछु और जन्म मोहे वृंदावन दीजो,
मेरे सांवरे रो रो पुकारू तेरा नाम रे,
रे मन मूरख तुझ से अपना पहचाना नहीं राम गया,
मोहे झांकी दे जा अपने मोर मुकुट की
गरीबों को मैया निभाना पड़ेगा,
बुलाए तुम्हें तुमको आना पड़ेगा
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