मइया रुनझुन आए जाओ,
नीमा तले,
झूला मत डालो रे कान्हा नाजुक डाल पीपल की,
होंठो पे मेरे जब भी बाबोसा नाम आये,
संत सिंगाजी महाराज, लगाय गया बाड़ी।
वृँदावन की इन कुँज गलिन में,
ख़ुशबू बिहारी जी की आती है,
भोले बाबा की शादी का, है त्यौहार जी।
सावन की बरसे बदरिया कान्हा की बाजे मुरलिया,
दिल दुखा के श्याम मथुरा चले गए,
तेरा नाम चल रहा है,
जय श्री श्याम चल रहा है…..
कैसी ये लीला दिखाई भोले बाबा,
हमारी समझ में ना आई भोले बाबा….
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