नर्मदा आछी आई हो, म्हारा देश मा,
शंकर भोले कृपा कीजे, मैं आधीन तुम्हारा,
नैया पार लगादे दाता, चरणां मं पड़ी । अब तो हो घोड़े असवार, घुमादे मोर की छड़ी।
इन अंखियो का संवरा नजारा
नजरे यो श्याम से मिली
मुरली वाले श्याम संग नाचूगी सहेलियों।
वृन्दावन जाऊँगा
मुझको रोको ना मैं तो वृन्दावन जाऊँगा।
चाँद जैसे चोथ को मेरा बालमा
हमनी के छोरी के नगरिया नु हो कहवा जयेबू ए माई ,
रंग रेजवा चुनरिया रंग डारी,
तेरी दया से चलता मेरा व्यपार बाला जी
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