अण घड़ीया देवा, कोई नहीं करे थारी सेवा।।
मेरे श्याम की कृपा नज़र जो मुझपे चल गई,
आ गए हो अगर श्याम इस मोड़ पर
हमसे मिलने मिलाने का वादा करो
भटका हु मुझको भी दर पे बुला ले अपना बना ले के मेरा यहाँ कोई नही,
माँ मेरा दिल लगदा ई ना
बोले जद वी बनेरे उते का
झूला डरे जमुना जी के पार पै हो मां ,
नाकोड़ा के भैरव नाथ
रहते भक्तो के साथ
मोहन मोहन मोहन पुकारु गलियों में
नीली छत के पीछे बैठा जाने कौन मदारी
माधवे मन न रहे, घर आओ ,
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