थारे मंदिरिये के माहीं,
थारे देवरिय के माहीं,
दादी, दादी, हो दादी,
सुन मारी सुरता अजब कामनी,
आव आव म्हारा कृष्ण मुरारी,
भगत बुलावे रे,
सांवरा वेगो आव।।
थारे ओरण वाली परिक्रमा,
श्री राणी सती दादी मंगल मनका
हो देवा थाने
मन सू ध्यावा जी,
मैं हारा मैं हारा
मुझे दे दो नाथ सहारा
हार गया हूं भटक भटक कर
कोई नहीं हमारा हमारा
प्रार्थना है यही
मेरी हनुमान जी,
मेरे सर पर भी
अब हाथ धर दीजिए,
सिया की सुनाऊं द्रोपद की सुनाऊं रुक्मणि की सुनाऊं सबको,
देखो मीरा की उमरिया कैसे गुजरी।
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