हरि नाम का प्याला ज़रा पीजिये,
चल वृन्दावन धाम, राधे गाएंगे
मेरा मन पंछी ये बोले उड़ वृन्दावन जाऊ।
जय जय राधे राधे राधिके,
दही बेचन को राधा चली, कन्हैया जी को प्यारी लगी
मैं हार के आया बाबा,
तूने जीत दिलाई है,
मैंने न देखे हनुमान अंगूठी कहां से लाए हैं।
हर ग्यारस की बाबा, तेरी रात जगाते है,
ग्यारस का व्रत में करती हरि नाम की माला जपती।
तुझ संग प्रीत लगाई मोहना, मोहना मोहना ओ कान्हा,
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