नीत प्रेम की गंगा बहती है बालाजी तुम्हारे चरणों में
चाँद से प्यारे बाबा श्याम, हमारी आँखों के तारे श्याम
उल्टे है हनुमान जहाँ, चोला सिंदूरी धारा,
मुझे बेटा कह के, बुलाया क्यों नहीं ,
गोविंदा गोपाला, भजो रे मन गोविंदा,
दुनिया रही न बाबा मेरे काम की,
बुट्टी तू पिला दे मने राम नाम की,
जिस पर भी ओ बाबा तेरा रंग चढ़ जाता ।
ओ बाबा इतना बता,
अब मैं जाऊं कहाँ,
सब कुछ दिया है तुमने,
इतना और सरकार दे दो,
तू कर ले व्रत ग्यारस का तू कर ले भजन हरि का,
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