दिलदार कन्हैया ने, मुझको अपनाया है,
तीनो लोक में गूंज रही जयकारों की आवाज।
सुनी है गोकुल नगरयिा,
आजा आजा सावरयिा,
तकदीर बनाने वाली मां तूने कैसी तकदीर बनाई है
जे तू न फड़दा साडी बाहँ असां रूल जाणा सी
गोकुल नगरिया में आया डमरू वाला।
मेरे लगन लगी उस मालिक की मैंने अपना पराया छोड़ दिया।
मैया बन गई थानेदार भगत सब बने सिपाही रे।
भजन बिना रेग्यो रे नर,
पशु के समान,
हरि नाम गा लो सहारा मिलेगा।
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