मुंदरिया साच बताये दे कहां पर छोड़े लक्ष्मण राम।
लाखों को तार दिया राम ने, गजब किया रघुवर के नाम ने
तेरी बंसी मार सुटया ओ सांवरे,
जनम लियो ज्यांने मरणो पड़सी ,
या रिमझिम करती भिलनी कठिने चाली रे।
अम्बर से फूलों की बरसात हो गई। भोले कि शादी गौरा से हो गई।
मेरे दुख में भी मेरे सुख में भी मेरे साथ निभाते हैं।
बड़े प्यारे लगे है भक्तों गजानन छोटे से।
केन्हयो मेरो छोटो सो राधेश्याम
लै गए चीर मुरारी, मैं कैसी करूँ।
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