द्वार पे बैठा राह निहारु, थक गए मेरे नैना
गोरा थारी जाँन तो चडीँ काँकड मे,
रँगीलो जोगी आयो परणबा ने…..
फकीरी, लागा नहीं शब्दों रा तीर ।।
अरे कोणी भूलूला गुण थारो ओ गुरासा मारो अबकोड़ों जन्म सुधारो।
सुन ओ कृष्ण की मां बहुत दिल काला है
है चाँद से ज्यादा सोना, मेरा श्याम सलोना,
अरे ओ अंजनी लाला वीर बजरंगी बाला
तेरी रहमतो ने हमको,
दर पर बुला लिया है,
शिव जी रो मनड़ो मोयो रे ,
भीलनी रंगीली।
तू तो चिंमटो बजा रे भोलानाथ छमा छम नाचूंगी।
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