मत बोले कड़वे बोल भभज तेरे रोज़ रोज़ नहीं आउंगी।
दौना में जलेबी बड़े रस की
मैं तो भात पहनूंगी मन भर की।
श्याम प्रेमियों का त्यौहार आ गया।
सरस्वती माता की आरती
तुझ बिन सुना है कैलाश, शिव ढूंढे जोगी बनकर रे।
खाटू हालो सावरियो भगता की पथ राखनियो
ओ साँवरिया आँख्या खोल तेरा सेवक अरज गुजारै।
फागुन के मौसम में मैं अपने बाबा के
दरबार आई,
ये माना बालाजी दिलदार तुम हो,
कान्हा रे कान्हा रे कान्हा रे। मैंने तुझे अपना माना रे।
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