रामचन्द्र रघुनाथ बन्ना थम सीता केसे ब्याहोगे
सूखी पड़ी है दिल की ज़मीं मुद्दतों से यार
जच्चा के घर लाल हुआ है,
बाजे बधाई अंगना,
रोए रहा रोए रहा ललना,
मेरा जियरा डोले, लल्ला रोए रहा,
खाटू जाइये री सास मेरी खाटू जाइये री
कब से तुमको पुकारे सांवरे आओ।
खाटू वाला बड़ा दिलवाला,
कान्हा ना चाहिए बैकुठ जन्म मोहे ब्रज में दीजो रे।
मेरे गुण अवगुण को पलडे में, ना तोलो तो अच्छा होगा।
You must be logged in to post a comment.