मेरे मन में बस गयो सांवरिया काली काली जुल्फन वालो,
Jannat se pyara Bharat hamara,
कन्हैया तुम्हारी झलक चाहते है
मुरलिया बाजे रे जमुना के तीर,
लहरे चुनरी मैया की लाली लाली,
सैय्यो नी मेरा शाम काले रंग दा।
वृषभानु लली गुण गाइये ।
हनुमत से बोली यूँ माता, क्यों मुख मुझे दिखाया है,
हे मेरे गुरुदेव करुणा सिन्धु करुणा कीजिये
सखी ये मेरे दो आए मेहमान।
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