अंजनी के लाला पर्वत जाईज्यो सा, आता तो लावज्यो संजीवन बूटी ।।
बाबा गाँव नीचे, भला बिराज्या आप, धणी जुगडा रे माय,
जब से सती ने छोड़ा शिव का ठिकाना,
होली खेलन देखो आयो रे, आयो बांके बिहारी,
जरा सो बाहर आजा सांवरा खेला ला होली।
गाली मत दीजो गरीबनी को जायो है
उड़बा दे रे लाल गुलाल महीनो फागण को।
गुजरिया पकड़ो हाथ छुड़ावे दीनानाथ।
सांवरे पर मुझे विश्वास है। जग की ना आस है।
राम भजो ने राजी राजी मारा बूढ़ा माजी ,
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