तेरी मटकन चटकन लटकन पे बलिहारी रे
काई कारण आयो जिवडा,
कई करवा लागो रे,
एक आसरो देव धणी रो,
दूजो माँ कंकाली को।
भांगडली गरनाई रे शिव थारा नैना मे
चूल्हा की आग हो तो पानी से बुझा दूं,म्हारा कालजा री आग बुझे कोनी।
भलाई भोला मार डालो जी थांके संग में रहबा में आवे लाज।
कान्हो बैठ्यों मंडफिया माय, बनकर सेठ सांवरीयो।
देखी जो सुरत आपकी,
मने दुजो नी आवे दाय रे,
गाया वाला कानजी रे,
थारी गाया ने पाछी घेर,
कुए पर एकली रे,
जिंदगी की राह में लोग हम से खेले हैं ।
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