थारी डगमग हाले नाड बुढापो खोटो छ
पिले पीताम्बर वालेया मैं केहनी आ,
नी मैं दूध काहे नाल रिडका चाटी
बड़े नसीबों से ही बेटी मिलती है।
लाडो मेरी तुझ में ही जान बसी रे।
ओ गुड़िया मेरी, ओ चिड़िया मेरी, तुझमें बस्ती है दुनिया मेरी
दुखड़ा रे माही म्हाने याद आवे कानजी
लिख दी मैंने कर दी मैंने,
जिंदगी बिहारी जी के नाम,
ज्योत जली तेरी तुझे आना पड़ेगा,
भज मन मेरे आठों याम,श्री राम जय राम जय जय राम।
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