मेरा मन नहीं लगे अकेले में। मुझे ले चल कान्हा मेले में।
आप पधारो कुलदेवी, मोटी मावड़ी जी,
बरसाने की मैं छोरी ओ कान्हा मोसे खेलो ना होली,
होलिया में उड़े रे गुलाल, बरसाने की गलियों में
रंग चटक डाल गेयो चोली में, सखी आग लगेगी होली में
होली खेलण ने नंदलाल बना म्हारे महल पधारो जी
बाबा अट्क्या काम बना दे, खाटु आवागा
सारे जग से न्यारा है, इस दर का नजारा है
खाटू में ही जीना है खाटू में ही मरना है।
लली तेरी जुग जुग जीवे,हो दुधा अमृत पीवे
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